आवो मिलकर करें सर्जना
आवो मिलकर करें सर्जना
आवो मिलकर करें सर्जना ऐसे हिंदुस्तान की,
जिसमें श्रद्धा पले-बढ़े नित,कुदरत व भगवान की।।
वृक्ष देवता माना जाए ,हरियाली की पूजा हो,
बाग-बगीचा,खेती-बारी,अन्न-फूल-फल-फल उपजा हो।
पशु-विहार व ताल-तलैया,पंछी-कलरव-तान-तान की।।
आवो मिलकर करें सर्जना.................।।
सत्य-अहिंसा ध्येय हो जिसका,आज़ादी जो समझ सके,
मानवता बस एक धर्म हो,बरबादी जो समझ सके।
समता-ममता,प्यार-मोहब्बत,करुणा व ईमान की।।
आवो मिलकर करें सर्जना.................।।
रहे नहीं अब कोई रेखा,जिसमें दुःखद गरीबी की,
छुआछूत सँग भेद-भाव की,रेखा मिटे अमीरी की।
बजे दुंदुभी जिसमें हर-पल,साक्षरता-अभियान की।।
आवो मिलकर करें सर्जना................।।
युवा बने जिस मुल्क़ का गौरव,ऐसा देश हमारा हो,
करे हौसले पस्त तिमिर के,रौशन जग सब सारा हो।
वतन-परस्ती के जज़्बे की,आन-बान व शान की।।
आवो मिलकर करें सर्जना...............।।
महँगाई की मार न हो जहाँ, सबकी रोजी बनी रहे,
बच्चा अपना बचपन जीए, सबकी रोटी पकी रहे।
नारी-शिक्षा और तरक्की, संसाधन - सम्मान की।।
आवो मिलकर करें सर्जना ऐसे हिंदुस्तान की।।
©डॉ0हरि नाथ मिश्र
9919446372
Arti khamborkar
21-Sep-2024 09:19 AM
amazing
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madhura
14-Aug-2024 07:43 PM
V nice
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